परम -प्रेम का हाला


साभार गुगल




परम -प्रेम का हाला
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प्रिय , पी कर बैठी हूँ तेरे हाथों से हाला
निज जीवन को बना रही रस का प्याला
प्राणांत तक उदित रहेगी मन में आस
विभोर उल्लासित रहेगा होगी पूरी प्यास
जय - विजय के संग आराधना का विश्वास
पूरित होती रहेगी जन्मों की अद्भुत साध
तुम बोलोगे रस मन में भर मुस्कुरा जाओ
प्रिय , बोलो तुम कैसे बंध गीत सुनाओगे
जीवन - हाहाकार में ह्दय को बहला जाओ
तपते हुई धरती को कोई सावन तो दे जाओ
तम कालिमा से कजरारी रात में तुम आओ
"अरु "जीवन में प्रकाश  लों ज़ला कर जाओ
आराधना राय "अरु"

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