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Showing posts from January, 2016

कह दूँ

मौन रहूँ या सब तुमसे कह दूँ
प्रीत की अनबुझी पहेलियाँ
अपने ह्दय पर हाथ रखूं
कैसे धुप मारी किलकारियाँ

अलसाया सूरज हँस पड़ा क्यों
सधन घन ने की जो चुगलियाँ
आसमान ने फिर आँखे खोली
उनीदीं अदिति ने ली अंगड़ाईयाँ

मौन रहूँ या सब कुछ तुमसे कह दूँ

आराधना राय "अरु"


क्या इरादा है

मौत का मुझ से इक वादा है बोलिए अब क्या इरादा है
 देख ली तोड़ कर अना अपनी मेरा कातिल भी कितना सादा है 
 ख्वाब में रोए रात जी भर कर  जुल्म कितना मुझ पे ज्यादा है
गर्क कर आए जहां को अपने जाने किस गाँव का बाशिंदा है
पास लाकर प्याला तोड़ दिया जाने क्या सोच कर जिंदा है
अजब से आइनों के साथ जिए  खुदा भी देख कर शर्मिंदा है
राह में साथ नहीं किसी रहबर का आशियाने में "अरु" कोई परिंदा है
आराधना राय "अरु"





































तेरे अश्कों से बात करते है ........ रात हम यूँ ही खाक करते है-

क्या मिला

उम्र भर का सिला
मुझको क्या मिला गुम कर के खयालात
तुझको क्या मिला सहारा में जैसे फूल खिला
दशत में रो कर क्या मिला रुसवा किया सरेबाज़ार
बता तुझको क्या मिला दिल अपना है बेजार
गम-ए -दिल बता क्या मिला अपने माज़ी को किया याद
बता तुझको क्या मिला हर्फ बिखरे मेरे उसके साथ
अरु बता उसको क्या मिला आराधना राय "अरु"

खण्डहर

खण्डहर हो जाने पर भी खड़ा रहता है सजग प्रहरी बन मौन और सुनाता रहता  है कथा-  जीवन की बिन कहे कौन निशब्द खन्डहर बताता समय  के हर बोल

मीरा

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साभार गूगल


प्रीत बावरी हो गई है
पिया की सावरी हो गई है
ऋतू आई मान की मनुहार की
बसंती बह रही व्यार है

आराधना राय "अरु"

बातें करें

उन के दरों -दीवार की बातें करें
दिल से दिल मिलाने की बातें करें
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कल तलक रहे बिल्कुल बे- आवाज़
आज उन के दीदार की बातें करें
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ज़मी चुप है,आसमां बड़ा खामोश
सख्त होते हालात की बातें करें
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मातम का होता है बस इक बहाना
शब-ए -गम में क्या मौंत की बातें करें
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हर एक कोई होता नहीं है मेहरबान
बेरहम दुनियाँ की क्या बातें करें
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दुख से मिलकर दुख का बादल छँटता
माँ के आँचल के सकूँ की बातें करें
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भूख से ऊंचा रहेगा सदा ही ईमान
बेबसी, भूख की क्या बातें करें
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हम भी है कायल तेरे ए आसमान
अरु देश के बदहालात की क्या बातें करें
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आराधना राय "अरु"