सावन
बूंद बूंद बन कर अम्बर से सावन की झड़ी लगी है मन के ताने बाने पे किस की नजर पड़ी है हरी वसुंधरा जल-मग्न हो कर क्या व्यथित हुई है तृषित चातक को स्वाति की बूंद कितनी मिल पाई है अम्बर...
लेखिका की रचनाये भारतीय कॉपीराइट एक्ट के तहत सुरक्षित है अंत रचनओं के साथ छेड़खानी दंडनीय अपराध माना जाएगा