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सावन

बूंद बूंद बन कर अम्बर से सावन की झड़ी लगी है मन के ताने बाने पे किस की नजर पड़ी है हरी वसुंधरा जल-मग्न हो कर क्या व्यथित हुई है तृषित चातक को स्वाति की बूंद कितनी मिल पाई है अम्बर...