दिन- रैना




राह देखते नहीं थकती
बिरहन रैना
पंथ निहारते है मेरे
 सिहरते नैना
दिन कि लिखावट
करते थकते
सुन- सुन कर
हारे बैना
प्रीत कि बाती बिन
बुझे मन चैना
दुख छुपा है
सखी, का से कहे
पीड कोई होना
आराधना राय "अरु "




Comments

  1. दिल को छूते अहसास...बहुत सुन्दर

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    1. हदय से नमन कैलाश जी

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 04 दिसम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  3. आप कि आभारी हूँ यशोधरा अग्रवाल जी

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