बदरा बरसे




साभार गुगल

रिम- झिम बदरा बरसे
मन ही मन हम तरसे

श्याम भई ऋतू काली
अखियाँ भरी है जल से

घर अंगना सब बिछडा
फूटे भाग्य से सब कलसे

रैना थी मनवाली मनकी
मिले नहीं साथी मन के

आग लगता बदरा आया
मिले नहीं पिय मोरे कलसे

आराधना राय "अरु"


Comments

  1. हसीन थी के तेरी जुल्फों में उलझी थी जब तलक
    अब चुभ रही है बूंदें जो मेरा आशियाना बहा गई!

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