ढूंढा क्यों था

दिल ये पूछे तुझे ढूंढा क्यों था
हवा बही ऐसे जैसे तू वही था

पन्ने के हर सफे पर नाम था
ना कहना नाम लिखा क्यों था

पुरवयां क्यों बही तेरे नाम की
आँखों ने क्यों भेजा पैगाम भी

सुना मगर तूने मुझे सुना ना था
कहा तूने मगर मुझे कहा ना था

फिजा ने भी कभी मुझे सुना ना था
दिल ने कहा पहले तुझे सुना ना था

कहती है दिल की धडकन शाम से
गीत कोई दिल ने मेरे सुना ना था

प्रीत तेरी-मेरी किसी ने बुनी ना थी
सागर और नदी की कहानी बुनी थी

सावन से मांग कर ये प्रीत भरी थी
ख्वाब ऐसा किसी ने कभी सुना ना था
आराधना राय "अरु"





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