चाँद

चाँद के साथ चाँदनी खिलखिलाती रही
तेरे बहाने से खुशियाँ दरीचे से आती रही

तू सहर सा मेरे दर को रोशन करती रही
तू मेरे घर में चाँद बन के जगमगाती रही 

वो खूबसूरत सा चेहरा ईद सा चाँद ही रही
इसी बहाने "अरु"बहार बन के वो आती रही
आराधना राय

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